Welcome!   Login अत्याचारी शेर और चालाक रैंचो: बाल कथा
Apr 2, 2017
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अत्याचारी शेर और चालाक रैंचो

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एक बार की बात है किसी जंगल में एक शेर रहता था| जो की जंगल के मासूम जानवरों पर बहुत अत्याचार किया करता था|

वह बिना वजह उन्हें मारता था, तथा उसने उनके जलाशय के पास जाने पर भी शर्त रखी थी|

शेर की शर्त

 

उसने कहा की “हर रोज एक जानवर मेरा भोजन बनने को मेरे पास आये नहीं तो मैं किसी को भी जलाशय का पानी पीने नहीं दूँगा|”

 

जंगल में सभा 

 

जंगल के सभी जानवर बहुत परेशान थे|

परेशान होकर उन्होंने एक सभा बुलाई, जिससे की इस समस्या का कोई समाधान निकला जा सके|

सभी जानवर सभा में पहुँचे और अपनी-अपनी राय दी|

लेकिन किसी के भी पास इस समस्या का सम्पूर्ण समाधान नहीं था|

इतने में रैंचो नाम के एक बन्दर ने कहा कि “मैं इस अत्याचारी शेर को सबक सिखाऊंगा|”

इतना कहकर वह वहाँ से चला गया|

अगले दिन वह एक पेड़ पर चढ़ गया जिसपर मधुमक्खियों का एक छत्ता था|

 

जैसे ही शेर उस पेड़ के नीचे से गुजरा रैंचो ने पेड़ पर से लटक रहे मधुमक्खियों के छत्ते पर पत्थर मारा|

पत्थर के लगते ही मधुमखियों ने शेर को काटना शुरू कर दिया| मधुमक्खियों के डंक से परेशान होकर शेर भागने लगा|

भागते हुए वह जंगल से बहार भाग गया|

इस प्रकार जंगल को शेर के अत्याचार से छुटकारा मिल गया|

रैंचो की बुद्धिमानी और साहस की चर्चा पूरे जंगल में शुरू हो गयी|

साहस और समझदारी से हर समस्या का समाधान निकिल जा सकता है|”

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