Welcome!   Login चील का आलस और जंगल का तूफ़ान - CHALK-N-SLATE
Apr 7, 2017
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चील का आलस और जंगल का तूफ़ान

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एक बार की बात है एक घने जंगल में एक बड़ा सा बरगद का पेड़ था| उस पेड़ पर चील का एक परिवार रहता था|

 

माता चील अपने बच्चों को उड़ना और शिकार करना सिखाती थी, और घोसले में पूरे परिवार के लिए भोजन जुटाने की जिम्मेदारी पिता चील की थी|

 

शान सभी चीलों में सबसे छोटा था| वह बहुत चालाक किन्तु बहुत ही अधिक आलसी था|

वह उड़ना और शिकार करना सीखना नहीं चाहता था|

वह कभी मेहनत नहीं करना चाहता था और घोसले में पड़े रहना चाहता था,

तथा अपने पिता के लाये हुए भोजन को खा कर आराम करना चाहता था|

एक दिन जब घर के  सभी सदस्य अपने अपने काम से बहार निकले, तो शान फिर से हर रोज की तरह घोसले में आराम कर रहा था|

भयंकर तूफ़ान….

उसी समय एक भयंकर तूफ़ान आया और सभी पेड़ पौधे जोरों से हिलने लगे|

 

शान अब भी अपने घोसले में निश्चिन्त होकर सो रहा था| बरगद का पेड़ विशाल था लेकिन तूफ़ान की तिव्रता अब बढ़ रही थी|

 

देखते ही देखते कुछ पेड़ों की टहनियां टूट कर गिरने लगीं, तथा कुछ कमजोर पेड़ भी अपनी जड़ों से उखड़ गये|

शान घबरा गया|

जैसे ही उसका घोसला हवा से जोरों से हिलने लगा वह वहां से भागने की कोशिश करने लगा|

उसने जैसे ही अपने पंख फैला कर उड़ने किलोशिश की वह गिरने लगा| हवा के तेज बहाव के सामने वह उड़ नहीं पा रहा था|

अब वह और अधिक घबरा गया, और मदद के लिए पुकारने लगा|

लेकिन आस पास कोई भी उसकी मदद करने वाला नहीं था| वह जैसे तैसे एक टहनी को पकड़कर तूफ़ान के थमने का इंतज़ार करने लगा|

बहुत समय तक इंतज़ार करते हुए उसे भूख भी लगी थी और वह रोने लगा|

उसे अपनी गलती का एहसास होने लगा| वह समझ चुका था कि अगर उसने आलस को त्यागकर अपने माता पिता के साथ गया होता तो वह इस मुसीबत से बच जाता और उड़ना भी सीख जाता|

 

“आलस्य हमेशा संकट को उत्पन्न करती है”

 

 

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