आशा की लौ को अपने अंदर जीवित रखें..

मनुष्य भोजन, पानी और हवा के बिना तो जिन्दा बचे रह सकता है, परन्तु आशा के बिना एक पल भी नहीं| मानव की आशा उसे जीवित रखती है|

दुःख नकारात्मकता का जन्मदाता

संघर्ष,उदासी, पराजय और घृणा हमारे जीवन में नकारात्मकता को जन्म देती हैं, और हम सकारात्मक चीजों के बारे में बात करने में झिझकते हैं|

 

लोगों ने यह भरोसा करना बंद क्र दिया है की मानवता अब भी है इस दुनिया में|

 

उन्होंने एक दुसरे से प्रेम करना बंद कर दिया है, क्योंकि वे सोचते हैं की ये रिश्ते शीघ्र ही टूट जायेंगे|

वे अपने जीवन में साहसिक फैसले नहीं लेते क्योंकि उन्हें लगता है की अगर वे असफल हुए तो सब उनकी हँसी उड़ायेंगे|

कुछ लोग जीवन के प्रति इतने निराशावादी हो जाते हैं की वे जीवन से मुह मोड़ लेते हैं और आत्महत्या कर लेते हैं| और उनका ये कदम उनलोगों के लिए एक बड़ा झटका साबित होता है जो किसी तरह से खुद को समझाने की कोशिश करते रहते हैं कि सब कुछ ठीक है|

हम कीमती हैं..

हम सभी नफरत, असफलता,टूटे हुए रिश्तों और हर  एक निराशाओं से जो मनुष्य हर्र रोज झेलता है से कहीं अधिक कीमती हैं|

एक उदाहरण..

जब एक निर्धन व्यक्ति को राजा ने सारी रात ठण्ड में झील में खड़ा रहने की सजा सुनाई तब वह झील में से कहीं दूर जल रहे आग को देखकर सोचता रहा की जब वह पानी से बहार निकलेगा तब उस आग से अपने शरीर को गर्म करेगा|

उसके इसी बात की आशा ने उसे जीवित रखा|

इसी कारण चाहे परिस्थिती कितनी भी खराब क्यों न हो हमें अपने आशा के दीपक को हमेशा प्रज्वलित रखना चाहिए|

आशा जीवित रहनी चाहिए

और हमें हमेशा अपने जीवन में कुछ अच्छा घटित होने की आशा करना चाहिए| आइये हम दूसरों को भी दिखाएं की अब भी सब कुछ ठीक है, इंसानियत अब भी जीवित है|

अगर आत्महत्या का उदाहरण हजारों लोगों को निराश कर सकता है तो कभी न हार मानने की एक घटना भी उन्हें उम्मीद से भर सकती है|

इसलिए आशा जीवित रहनी चाहिए|

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