वजूद की खोज:एक सफ़रनामा खुद की खोज में

वजूद की खोज..

इस भीड़ में तुम क्या ढून्ढ रहे हो?

जंगलों में, परिंदों की चहकने में,और हर उस चीज़ में जो तुम्हारे अस पास है,

और जिसे तुम अपनी खुली आँखों से देख पा रहे हो; तुम कुछ ढूंढ रहे हो|

इस दुनिया में हर कोई एक खास मकसद और कारण के साथ आया है|

उसे अपनी मंजिल को छूना है, अपने वजूद को सार्थक करना है|

क्या सब ऐसा कर रहे हैं?

लेकिन की क्या सब लोग वह कर रहे हैं जो उन्हें करना चाहिए था, जिस कारण से वह इस दुनिया में आये हैं?
या फिर वे अब वह कर रहे हैं जो उन्हें करने को कहा जा रहा है?

क्या उन्होंने कभी ये जानने की कोशिश की कि वे क्या चाहते हैं?

या फिर वे इस बारे में सोचना भी नहीं चाहते?

यह जैसे सिक्के के सिर्फ एक ही पहलू को देखने के जैसे है जो सिक्के की कीमत बताती है,

और हम बहुत कम ही सिक्के के दूसरे सिरे को देखते हैं|

हो सकता है की आप अपने रास्ते पर न हों, और किसी अन्य शक्ति के द्वारा भ्रमित होकर अपना रास्ता भटक गये हों|

अगर आप अपने वजूद को ढूँढना चाहते हैं तो भीड़ और कोलाहल के पार देखने की कोशिश करें|

शून्य में देखने की कोशिश करें, वहाँ आपको जवाब मिलेगा|

आँखों को बंद करके उन हवाओं की बातों को सुनने का प्रयास करें जो आपके कानों से होकर गुजरती हैं|

ये हवाएं आपके लिए ईश्वर के सन्देश लाती हैं|

आप हमेशा ही एक बड़े कार्य को पूरा करने के लिए आये थे,

आपका जन्म सिर्फ मरने के लिए नहीं हुआ है|

क्योंकि हम में से हर एक को चमकने का बराबर अधिकार मिला है|

तो अपने कदम बढ़ाएं और अपनी मंजिल को ओर क्योंकि ये रास्ता लम्बा और कठिन है|

लेकिन उन चीजों को करने में कैसा मज़ा जो आसान हों?

रास्ते में बहुत सी आवाजें आपको भ्रमायेंगी तब आप उन हवाओं की बातों को याद कर लेना जिन्होंने आपको ईश्वर का सन्देश सुनाया था|

जब ईश्वर ने आपको उस योजना से रूबरू कराया तो उसने आपको उसे पूरा करने की सकती भी दी है|

Leave a Reply