Welcome!   Login सवाल और जीवन: एक अटूट सम्बन्ध - CHALK-N-SLATE
May 3, 2017
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सवाल और जीवन: एक अटूट सम्बन्ध

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सवाल

“सवाल”.. यह सिर्फ एक शब्द नहीं है, बल्कि अपने आप में पूरी दुनिया को समेटे हुए है|

सवाल का अस्तित्व सिर्फ जवाब पर जाकर खत्म नहीं होता, लेकिन यह तो वह बिंदु है जिसके इर्द गिर्द पूरी दुनिया घूमती है|

यह जीवन के हर एक बिंदु को समेटे हुए है, बहुत सारे रहस्यों के साथ|

समस्या सिर्फ गणित के सवालों में नहीं, ना ही व्याकरण के वाक्यों को सटीक करने में|

यह इन्सान के ज़िन्दगी का एक ऐसा भाग है जो उसके जन्म लेने से उसकी मृत्यु तक उसका साथ नहीं छोड़ता|

बस सवालों के आकर और गहराइयाँ बदलती रहती हैं|

यह इन्सान के जीवन में एक उस नशे की तरह है जिसके आभाव में इन्सान जीवित नहीं रह सकता|

इन्सान के जीवन में सवाल भोजन के नमक की तरह है|

वह सवाल ही है जो इन्सान को एक दुसरे से विचार और समझ में अलग करता है|

मनुष्य के भाव सवालों के प्रति अलग हो सकते हैं, जो उन्हें एक दुसरे से अलग करते हैं|

जब एक बच्चा जन्म लेता है तो उसकी मासूमियत और आस-पास के चीजों को जानने की समझने की इच्छा उसके भीतर सवाल को जन्म देती है|

प्रश्न इन्सान के विवेक को और अधिक जागृत करने का एक माध्यम है|

मन में सवालों का होना अच्छा है, सवाल जिज्ञासा को दर्शाते हैं|

जिज्ञासा हमारे अंदर ज्ञान के सृजन का एक माध्यम है|

हमारे दिमाग के अन्दर जो सवाल बचपन में होते हैं वो समय के साथ बदलते हैं|

समय के साथ वे सवाल हमारे दिमाग में अपनी जड़ों को मजबूत करते जाती हैं|

जीवन और सवाल एक साथ हमेशा एक दूसरे के साथ एक दूसरे का हाथ पकड़े हुए आगे बढ़ते रहते हैं|

और ये दोनों एक दूसरे के पूरक है, और जब ये दोनों एक दूसरे में समां जाते हैं तो ये ज्ञान को जन्म देते हैं|

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