हम तो भूखे हैं, हमें धर्म समझ नहीं आता…

“क्या हिन्दू? क्या मुस्लिम? क्या सिख? क्या इसाई? हम भूखे हैं साहिब हमें धर्म समझ नहीं आता|” ये बातें मुझसे एक बूढ़े भिखारी ने कही जब मैंने उससे पूछा की वह हिन्दू है या मुस्लमान?

इतने दिनों बाद भी मुझे उसकी आँखों में छिपा वह सवाल याद है जो उसकी जवाब में छिपा था| जब मैंने उससे कहा की वह तो भगवन के नाम पर मांग रहा है तो उसने कहा “मैंने धर्म नहीं भगवन के नाम पर माँगा है|”

वह कहता गया “जब आपका पेट भरा हुआ हो तो धर्म,जाति और धर्म की रक्षा उन दुश्मनों से कैसे की जाए जिन्हें हमने खुद पैदा किया है? इन मुद्दों पर बातें करना बहुत अच्छा लगता है|

जूस पीना और भूख हड़ताल करना आप लोगों का सृंगार है साहिब, हमारे यहाँ तो खाने ने ही हड़ताल कर रखा है|”

लोगों का भ्रम 

“लोग समझते हैं की वे अपने धर्म की रक्षा कर रहे हैं, पर वे यह नि समझ पाते की की जिस सर्वशक्तिमान ईश्वर ने हमें बनाया और जिसके सामने हम सब हाथ फैलाते  हैं उसे सुरक्षा की जरूरत नहीं|

वे लोगों को राम और अल्लाह के नाम पर लोगों को मारते हैं, और जब हम अल्लाह या राम के नाम पर उनसे माँगते हैं तो वे एक सिक्का उछालते हुए अंदर पवित्र स्थानों में भीख माँगने जाते हैं|

उस दिन उस भिखारी ने मेरी आत्मा को झंकझोर के रख दिया| जब हमें गरीबी, आतंकवाद और भूख से लड़ना चाहिए उस समय हम अपने-अपने धर्मो को बचाने के लिए लड़ाई कर रहे हैं|

जिस समय  हमें एक गरीब बच्चे को गोद लेना चाहिए और एक भूखे भिखारी को भोजन कराना चाहिए तब हम धन जुटा रहे हैं अपने भगवन को बचने के लिए|

 

अब मैं भी उन लोगों में से हूँ जो भगवन की पूजा करते हैं पर जिनका कोई धर्म नहीं होता|

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