हम भारतीय: शिकायत अपनी आदत

हम भारतीय लोग हैं, अपनी परम्पराओं और उनके मूल्यों का पूरा सम्मान करते हैं|

कुछ चीजें हैं हमारे देश में जो आज भी अपनी साख मजबूत किये हुए हैं,

एकदम जैसे खूंटा ही गाड़े बैठे हों|

कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक हर क्षेत्र में अलग-अलग चीजों की अपनी ही एक बिसात है|

कश्मीर में डल में तैरते हुए शिकारे से लेकर आगरा के पेठे

और चांदनी चौक के आलू पराठे आज भी नहीं बदले|

ठीक इन सब चीजों की तरह नहीं बदले हमारे विचार, जो कहीं कहीं काफी पिछड़े हुए हैं|

हमारी आदतें जो नहीं बदली शिकायतों की|

गिले शिकवे रखना तोह जैसे मौलिक अधिकार ही हैं हम भारतियों के|

चलती हुई ट्रेन और दूसरी की गलतियों को पकड़ने में तो हम बिल्कुल उस्ताद ही हैं समझ लीजिये|

समय बिताने के लिए शिकायतें करना तो जैसे हमारी सबसे पसंदीदा है|

जरा सी चूक हुई नहीं किसी से की बस नब्ज पकड़ लेते हैं हम, और फिर..

फिर क्या जनाब उसे दबाने में भी हमने महारत हासिल कर रखी है|

चाहे हम खुद कितनी भी गंदगियाँ फैलाएं, गंदगी देख कर सर्कार को कोसना नहीं भूलते|

क्योंकि सरकार भादवां की तरह है चाहे कुछ भी हो अंत में ठीकरा उसी के सर पर फोड़ना सबसे बेहतर और सुगम होता है|

अरे भईया! अगर कचरा सड़क पर जमा है तो जाओ थोडा श्रमदान कर लो यार देश के लिये बस भाषण ही दोगे टोली में?

वोट देकर तो आप सब सो जाते हो| पांच सालों में एक दिन निकलते हो, या कभी कभी वो भी नहीं निकलते|

और बाकि दिन फेसबुक और सोशल मीडिया पर मोदी जी को लगे गालियाँ देने|

अमा मियां एक बात बताओ पिछ्ली सरकार में कब राम राज देख लिया आपने की आज उसकी चर्चा करने लग गये?

जिसने कभी मिठाई नहीं खाई वो मीठे और नमकीन में फर्क बता रहा है| ये काफी गलत बात है भईया|

परंपरा बदलने से अगर किस्मत बदलती है तो उसे बदलने के बारे में सोचें|

मेरा तो हो गया अब आप मेरी शिकायतें कर सकते हैं|

 

 

 

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