होली: रंग भारत के पहचान के

हमारा देश भारत त्योहारों, रिवाजों और अनेकता में एकता का देश है|
हम होली, दिवाली, ईद, क्रिसमस और गुरु पर्व एक साथ मनाते हैं|
हर एक त्यौहार के अपने अलग महत्त्व है, दिवाली दीयों का,तो ईद अकीदत का|
हिन्दू और मुसलमान सैकड़ों वर्षों से एक साथ रहते आ रहे हैं| ईश्वर को चाहे हम अलग नामों से जरूर पुकारते हों, पर कुछ चीजें हैं जो हमें एक करती हैं|
तमाम सियासी ताने बाने के बावजूद हम आज भी एक देश देश में हैं और अनेकता में एकता की एक सच्ची मिसाल पैदा करते हैं|
भरोसा करिए ये मिसाल आप और कहीं नहीं ढूंढ पाएंगे|
होली एक ऐसा त्यौहार है जो मेरे इस बात को और पक्का करती है|
होली केवल हिन्दुओं का त्यौहार नहीं बल्कि ये जितनी हिन्दुओं की है, उतनी ही ये हमारे मुसलमान भाइयों की और बाकि सभी धर्म के लोगों के लिए है|
जहाँ हिन्दू होलिका दहन के दिन को बुराई पर अच्छाई के जीत के रूप में मानते हैं, और होली के दिन एक दुसरे को रंग लगाकर ख़ुशी का इजहार करते हैं|
वहीँ सूफी संतों के मजारों पर होली की अलग ही धूम होती है|
सूफी संत निजाम्मुद्दीन औलिया के दरगाह पर गाये जाने वाले गीत “रंग” हर किसी के दिल को छू लेती है|
मुग़ल सम्राट बहादुर शाह ज़फर के लिखे हुए होली के गीत आज भी काफी मशहूर हैं|
होली हमारे देश के विभिन्न भागों में जात्रा, बसंत उत्सव और अलग अलग नामों से मनायी जाती है|
होली के दिन रंगों से खेलने की पुरानी परम्परा है, लोग एक दुसरे को रंग लगा कर खुशियों का इज़हार करते हैं|
विदेशों में बसे हुए भारतवासी भी अपने अपने जगहों पर होली मनाते हैं, होली विदेशियों के बीच में भी काफी लोकप्रिय है|
ब्रज की लठमार होली विदेशी पर्यटकों के बीच काफी प्रचलित है|
हमारे त्यौहार, हमारी परम्परा हमारी पहचान हैं| ये हमें एक दुसरे से जोड़े रहती हैं|
होली सिर्फ रंगों का ही नहीं, प्रेम सौहार्द और भारत की पहचान का त्यौहार भी है|

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