Month: April 2018

मैं रब हूँ

ना मंदिर में बैठा, ना मस्ज़िद में मैं हूँ। गुरूद्वारे की चौकठ, ना गिरजे में तय हूँ। मैं रब हूँ […]

दास्तान क्या सुनाऊँ

भीड़ में भागती इस दुनिया का किस्सा क्या सुनाऊँ, कुछ चेहरे हैं खामोश से उनकी दास्तान क्या सुनाऊँ। ज़िन्दगी की […]