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April 2018

मैं रब हूँ

ना मंदिर में बैठा, ना मस्ज़िद में मैं हूँ। गुरूद्वारे की चौकठ, ना गिरजे में तय हूँ। मैं रब हूँ मैं रब हूँ। ना हिन्दू ने देखा, ना मुसलमाँ ने जाना। ना सिक्खों ने माना, ना ईसाई ने पहचाना। है इंसां का चर्चा, जहाँ पर भी होता, तेरे दिल की …

दास्तान क्या सुनाऊँ

भीड़ में भागती इस दुनिया का किस्सा क्या सुनाऊँ, कुछ चेहरे हैं खामोश से उनकी दास्तान क्या सुनाऊँ। ज़िन्दगी की रफ़्तार में एक अपनी ही रवानी है, रंगमंच के पीछे एक अलग ही कहानी है। मुकम्मल इश्क़ की सब मिसालें बहुत देते हैं, दरिया और बारिश ने राज़ संभाले बहुत …