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chalkNslate » देशभक्ति

लकीरें

अरसे बीत गए खेतों के मेडों पर दौड़ लगाये हुए, कटी पतंगों के पीछे सरहदों को लांघा था हमने। मेरे बेबाक बंजारेपन को जाने किसकी नजर लग गयी, ऐ खुदा ! तेरे इस जहाँ में ये लकीरें क्यों खीच गयीं? तब सेवईयां भी हमारी थीं और लड्डू भी हमारे थे, राम भी हमारे थे और रहीम भी हमारे थे, इस भोलेपन पर इक काली स्याही सी पुत गयी, ऐ खुदा! तेरे इस जहाँ में ये लकीरें क्यों खीच गयीं? सर कटाये थे जिस आसमाँ के तले, तब लहू एक हमारा था। जब मिला लहू मिट्टी से तब हिन्दुस्तान हमारा था पाकिस्तान तुम्हारा था। … Read entire article »

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